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Wednesday, May 27, 2020

मैं बुरा था या नही

तू कहती है की मैं बुरा हूँ |



तू कोसती है यह कह की मैंने तेरी कभी फ़िक्र न की | तू ताने मरती है की मैंने कभी तेरा धयान नहीं रखा|

हो सकता है तू सही कह रही हो | हो सकता है की मैं थोड़ा सा खड़ूस था | अजीब सा था मैं | काफी अजीब सा

मैं खुद को दूर रखता था इनसब से | क्यूंकि मुझे विस्वास नहीं था की मुझे दुबारा से कभी प्यार हो पायेगा दुबारा से फिर किसी के बारे में दिल से सोच पाउँगा , फिर किसी के बारे में ख़याली पुलाव पकाऊँगा , की कैसे हम लोग साथ रहेंगे कैसे हम लोगों के बचे होंगे कैसे हम लोग अपना पुलिंदा बनाएंगे | काफी सोचता था मैंने

लेकिन किसी और के साथ | थी वो एक लड़की | अच्छी लगती थी मुझे | काफी पसंद भी करती थी लेकिन कभी जिक्र नहीं करा | बिलकुल वैसे ही धयान रखती थी जैसी की तू मेरा | लेकिन फर्क सिर्फ इतना था की मैंने भी रखना चालू करा था उसका धयान | सोचते थे की हम दोनों की शादी हो जाएगी तो यह करेंगे वह करेंगे ऐसे रहेंगे वैसे रहेंगे | लेकिन बेडा गर्क हो ऐसे समाज का जो अपने लिए जीने नहीं देता | समझ जीने देता है तो बस समझ के लिए |

चली गई वह किसी और के साथ जो उसके समाज का था लेकिन एक बार भी नहीं कहा उसने की में दिल का बुरा  था | चंद लम्हों में सीखा गई की इंसान कभी बुरा नहीं होता , बुरी होती है समाज , बुरा होता है वह हाल जिसमें हम रह कर कुछ कदम उठाते हैं

उठाया होगा मैंने भी कुछ कदम | दिखाई होगी मैंने भी कुछ बैरुखियाँ जिसको देखके तुझे लगा होगा थोड़ा अजीब

और कह दिया होगा तूने बहुत बुरा है तू

लेकिन में तो बस इतना ही कहूंगा की " मैं  दिल का बुरा नहीं हूँ "

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